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हिमाचल में फिल्म सिटी के बजाय फिल्म पॉलिसी क्यों ज़रूरी है?

Film Director Ajay Saklani
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अभी पिछले दिनों फिल्म व थिएटर के कलाकार शिमला में मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर तथा परिवहन व वन मंत्री श्री गोविन्द सिंह ठाकुर जी से मिले और हिमाचली सिनेमा के विकास के लिए अपने विचार साझा किए।

Film & Entertainment Award

इस मुलाक़ात के दौरान हिमाचल में सिनेमा के विकास के लिए फिल्म पॉलिसी बनाने तथा हिमाचल फिल्म व थिएटर विकास परिषद् की स्थापना की मांग रखी गई।

इसके साथ ही कलाकारों ने हिमाचल की अलग अलग बोलियों को मिलकर, एक हिमाचली भाषा पर काम करने का भी आग्रह किया। परन्तु इस सब के बीच अभी भी कुछ लोग पुरज़ोर से इस कोशिश में लगे हुए हैं कि फिल्म पॉलिसी बनाने के बजाय फिल्म सिटी का निर्माण किया जाए। इससे पहले कि हम फिल्म सिटी और फिल्म पॉलिसी पर चर्चा करें, हमें इन दोनों शब्दों को अच्छे से समझ लेना चाहिए।

फिल्म पालिसी क्या है?

फिल्म पॉलिसी का सीधा-सीधा अर्थ है हिमाचल में फिल्म बनाने के लिए नियमों को सरल करना व फिल्म निर्माता व निर्देशकों की जितनी संभव हो सके उतनी आर्थिक व व्यावहारिक तौर पर मदद करना। व्यावहारिक तौर पर सभी निर्माताओं को हिमाचल में फिल्म शूटिंग के दौरान हर संभव मदद की जानी ज़रूरी है परन्तु जब बात आर्थिक तौर पर सहायता की आती है तो उसे सीधे-सीधे हिमाचली सिनेमा से जोड़ा जाना चाहिए। जब हम हिमाचली सिनेमा की बात करते हैं तो सबसे पहले हिमाचली सिनेमा की समस्याओं को समझना ज़रूरी है जो कि इस प्रकार है:

  • एक हिमाचली भाषा ना होना 
  • हिमाचल में सिनेमा हॉल की कमी के कारण फिल्म में लगा हुआ पैसा वापस कमाना 
  • कोई भी टीवी चैनल ना होने की वजह से फिल्म को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचा और पैसा वापस कमाना 
  • काम लागत में फिल्म बनाने की कोशिश कर रहे हिमाचली निर्माताओं को सरकार की तरफ से कोई सहयोग ना मिल पाना इत्यादि।

फिल्म पॉलिसी बनने से हिमाचली सिनेमा का विकास हो सकता हैं और उसमें कुछ अहम् बातों का होना ज़रूरी है जैसे की:

  • हिमाचली भाषा के फिल्म निर्माताओं को सरकार की तरफ से आर्थिक सहयोग मिले 
  • हिमाचली फिल्म निर्माताओं को प्रदेश में कहीं भी बिना सरकार को फीस दिए शूटिंग करने की अनुमति मिले 
  • दूर-दराज़ के क्षेत्रों में शूटिंग के दौरान ठहरने के लिए सरकारी रेस्ट हाउस में व्यवस्था हो और जितने दिन शूटिंग हो उतने दिन के लिए वो वहाँ रह सकें।
  • हिमाचल में सिनेमा हॉल बनाने में सरकार सहायता करे और सिनेमा हॉल को आसानी से लाइसेंस दे 
  • हिमाचली फिल्मों को टैक्स फ्री किया जाए 
  • हर सिनेमा हॉल में हिमाचली फिल्मों के लिए शो आरक्षित किए जाएं जैसे कि महाराष्ट्र, बंगाल और अन्य राज्यों में है
  • शूटिंग परमिशन लेने के लिए तरीके सरल बनाए जाएं, इत्यादि।Himachal FIlm & Entertainment Award

इनके अलावा और भी बहुत सारे पहलू हैं जिनपर कि गौर करना बहुत ज़रूरी है ताकि हिमाचली सिनेमा ऊपर आ सके और फिल्म निर्माता हिमाचली भाषा में फिल्म बनाना शुरू करें।

फिल्म सिटी क्या है और फिल्म सिटी बनाना ज़रूरी है क्या?

फिल्म सिटी का अर्थ है एक ऐसा स्थान जहां पर फिल्म बनाने के लिए सभी तरह की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हों. क्योंकि हिमाचल में अभी तक ऐसी कोई जगह नहीं है इसलिए कुछ लोग फिल्म सिटी का सवाल उठा रहे हैं. जहां तक शूटिंग की बात है तो हिमचाल में शूटिंग के लिए लोकेशन बनाने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि प्राकृतिक रूप से हिमाचल बेहद खूबसूरत है और शूटिंग कहीं भी की जा सकती है. परन्तु शूटिंग के बाद के काम के लिए जैसे एडिटिंग, साउंड, Vfx, Color Grading, इत्यादि के लिए फिल्म सिटी के बारे में सोचा जा सकता है. परन्तु जहां अभी तक सिनेमा की ही शुरुआत नहीं हुई है वहाँ यह सब बनाने का कोई फायदा नहीं। साथ ही साथ फिल्म सिटी बनाने से हिमाचली सिनेमा के विकास के बजाय फिर से बॉलीवुड का ही काम होगा। क्योंकि:

  • फिल्म सिटी के लिए जैसे ही सरकार की तरफ से ज़मीन मुहैया करवाई जाएगी वह सीधे सीधे SEZ (स्पेशल इकनोमिक ज़ोन) के दायरे में आ जाएगी जिस कारण कोई भी बाहर के व्यक्ति वहाँ अपने अपने स्टूडियो बना पाएंगे।
  • करप्शन की वजह से ज़्यादातर ज़मीन कलाकारों के बजाय उद्योगपतियों के हाथों में चली जाएगी।
  • फिल्म सिटी में आधारभूत सुविधाएं बनाने के लिए करोड़ों रुपए की ज़रूरत पड़ेगी और कोई भी हिमाचली फिल्म निर्माता इतना अमीर नहीं है कि यह सब कर पाए.
  • आधारभूत सुविधाएं पूरी करने के लिए अरबों रुपए की ज़रूरत होगी जो ना तो सरकार पूरा कर पाएगी और ना ही हिमाचली फिल्म निर्माता।

फिल्म पालिसी बनाम फिल्म सिटी 

  • फिल्म पालिसी फिल्म निर्माण आसान करेगी जबकि फिल्म सिटी इस ओर कुछ भी सकारात्मक करती नज़र नहीं आती 
  • फिल्म पालिसी बनाने से हिमाचली सिनेमा के विकास के लिए निर्माता आगे आएंगे जबकि फिल्म सिटी बनने से केवल हिंदी फिल्मों का ही निर्माण होगा और हिमाचली सिनेमा का सपना अधूरा ही रह जाएगा।
  • फिल्म पॉलिसी आर्थिक रूप से कमज़ोर परन्तु रचनात्मक व तकनिकी रूप से सक्षम फिल्म निर्माताओं को आगे बढ़ने और हिमाचली सिनेमा के विकास में मदद करेगी। जबकि फिल्म सिटी केवल आर्थिक रूप से मजबूत निर्माताओं के लिए ही फायदेमंद होगी।

ऐसे और भी बहुत सारे पहलू हैं जो फिल्म पॉलिसी का समर्थन करते हैं. क्योंकि हर पहलू यहां लिख पाना संभव नहीं है इसलिए और जो भी पहलू आपको लगता है की हो सकते हैं कृपया निचे कमेंट में ज़रूर लिखें।


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